विषय:- “हर श्वांस में उमंग उत्साह – तो होगी सदा सुरक्षा”

क्लास का यू-ट्यूब लिंक –

https://youtu.be/WJdDt8GY2UE

*Open Invitation for all BKs* by Brahma Kumaris, Navsari.

*Youtube Live* Inspirational Class *in Hindi* 

*TOPIC*: “Har Shwaans Mein Umang Utsaah, to hogi sada Suraksha” 

“हर श्वांस में उमंग उत्साह, तो होगी सदा सुरक्षा”

*SPEAKER*:  Rajyogini BK Dr. Sunita Didi, PhD, Sr. Rajyoga Teacher, Shantivan, BKHQ, Abu Road.

Om shanti

बी.के. भाई – बहनों की स्व उन्नति के लिए ऑनलाइन विशेष क्लास का आयोजन

आयोजक:- राजयोगिनी बी.के. गीता बहन जी, नवसारी सेवाकेंद्र

वक्ता :- राजयोगिनी डॉ.बी.के. सुनीता दीदी (शांतिवन-आबू)

विषय:- हर श्वांस में उमंग उत्साह – तो होगी सदा सुरक्षा

इस कोरोना काल में जबकि सेवाकेंद्रो द्वारा प्रत्यक्ष सेवायें नहीं हो पा रही हैं, सेवाओं का रूप बदल गया है, कहीं पर आना जाना लगभग बंद समान ही है| ऐसे में जबकि दुनिया में लोगो में डिप्रेशन बढ़ता जा रहा है तो सर्व ब्राह्मण परिवार के भाई-बहनों में उमंग-उत्साह बना रहे और प्रति पल बढ़ता जाये इस उद्देश्य को लेकर विशेष क्लास का आयोजन नवसारी सेवाकेंद्र द्वारा ऑनलाइन किया गया|

सर्व प्रथम राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी ने डॉ.बी.के. सुनीता बहन का शब्दों और पुष्पगुच्छ के द्वारा स्वागत किया| सर्व ऑनलाइन जुड़े भाई-बहनों का भी स्वागत करते हुए सभी को डॉ.बी.के. सुनीता बहन से परिचित कराया|

राजयोगिनी डॉ. बी.के. सुनीता दीदी:-

बी.के. सुनीता दीदी ने कहा कि ब्राह्मण जीवन का श्वांस ही उमंग उत्साह है | जैसे अभी कोरोना नाम की महामारी फैली हुए है जिसमे ओक्सीजन लेवल कम हो जाता है जोकि जीवन के लिए खतरा बन जाता है, उसी प्रकार से हमें भी अपने इस ब्राह्मण जीवन में उमंग उत्साह कम अर्थात् ओक्सीजन लेवल घट तो नहीं रहा है? नहीं तो ये श्रेष्ठतम जीवन में हम आगे चल नहीं पाएंगे|

उन्होंने कहा कि दुनिया में तो अलग-अलग उत्सव मनाकर उत्साह में रहने का प्रयास करते लेकिन अभी तो इस कोरोना बीमारी के कारण वो अल्पकाल का उत्साह भी लोगो के जीवन से छिन सा गया है इसलिए आजकल डिप्रेशन के केस बढ़ते जा रहे हैं|

उन्होंने विषय को न्याय देते हुए, स्वयं उत्साहपूर्वक सभी को उमंग उत्साह में रहने के टिप्स बताये:-

*सबसे पहले तो हमें ईश्वरीय महावाक्य अर्थात् बाबा की मुरली हर रोज़ प्यार और एकाग्रता से पढनी या सुननी है जिसमे रोज़-रोज़  भगवान हमें ऊँचे-ऊँचे स्वमान देते हैं – जैसे तुम सतयुग के विश्व महाराजन बनते हो, 21 जन्म तो क्या द्वापरयुग से भक्त और पुजारी भी आपके यादगारों से अपने में उमंग-उत्साह और शक्ति, ख़ुशी भरते हैं इसलिए आपको सदा खुशी में रहना है|

*भगवान हमें इतने ऊँचे स्वमान देते और हम इधर-उधर की बातें सुनकर, दूसरों की सुनकर-देखकर मायूस हो तो सोचो भगवन को कैसा लगेगा? बस हमें भगवान का ही सुनना है और अपने लक्ष्य की और आगे बढ़ते जाना है|

कभी भी –किसी भी बात में नेगेटिविटी को अपने मन-बुद्धि को टच भी नही करने दो| शिव बाबा कहते कि-जैसे दूसरों को पोजिटिविटी का कोर्स करते ऐसे स्वयं को भी स्वयं ही कराओ| उमंग-उत्साह का एफिडेविट कर दो तो वो वाइब्रेशन स्वत: ही दूसरों को भी मिलते रहेंगे|

*कोई भी परिस्थिति आती है तो व्हाई –व्हाई के बजाय वाह-वाह करना है क्यूकि हर परिस्थिति हमें कुछ सिखाने आती है, निर्माण बनती है| कहाँ हमें ज्ञान का अभिमान न आ जाये | हर समस्या का समाधान मुरली से मिलता है अत: बार-बार मुरली पढ़ते रहें|

*ओक्सिजन लेवल (उमंग-उत्साह) ठीक रहे| यदि प्रेशर ज्यादा हो गया तो अभिमान आ जायेगा और कम हो गया तो हीन-भावना आ जाएगी| इसलिए परिस्थिति आती है जिससे लेवल मेन्टेन रहे| इसलिए परिस्थिति को थैंक्स दें|

*किसी की कमजोरी की बातें हमें सुननी या देखनी नहीं है क्योंकि इससे कब हम स्वयं उन कमजोरियों का स्वरूप बन जायेंगे हमें पता भी नहीं चलेगा | और अगर वर्णन करते तो वो भी जैसे उस आत्मा को श्राप देना हुआ|

* अपने लक्ष्य को सदा ध्यान में रखना है की हम नर से नारायण बनने आये हैं नारद नहीं इसलिए श्वांस (उमंग-उत्साह) लेते भी रहे और छोड़ते (देतें, फैलाते) भी रहें|

*पुरुषार्थ में, सेवा में, जीवन में हमेशा ही कुछ न कुछ नया करते रहे| नवीनता से उदासीनता समाप्त हो जायेगी और उमंग-उत्साह बना रहेगा |

*ख़ुशी हमारे अन्दर है, हमारी आत्मा का गुण है इसलिए ज्यादा से ज्यादा आत्मिक स्थिति में रहने का अभ्यास करें और मन से मधुबन की सैर करते रहे तो उमंग-उत्साह बना रहेगा|

अंत में कई भाई बहनों ने अपने मन की दुविधा को राजयोगिनी डॉ. बी.के. सुनीता दीदी के सामने प्रश्नों के रूप में रखकर समाधान प्राप्त किये|

सर्व ने बहुत ही उमंग-उत्साह से अपने-अपने पुरुषार्थ में नवीनता के नए-नए दृढ़ संकल्प भी लाइव चैट में लिखकर व्यक्त किये|

राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी ने सर्व की और से बी.के. सुनीता बहन का आभार व्यक्त किया तथा अपने जीवन के अनुभव भी सुनाये|

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On Teachers Day:- “TEACHERS HARBINGERS OF CHANGE”

5th Sep. 2020_”Internation Teachers Day”

 

नवसारी के प्रख्यात “अग्रवाल एजुकेशन फाउंडेशन” तथा “एस.एस. अग्रवाल ग्रुप्स ऑफ़ कॉलेज” में ट्रस्टी भ्राता मुकेश अग्रवाल एवं प्रिंसिपल श्रीमती वैशाली पारेख (कोआर्डिनेटर) के द्वारा विशेष INTERNATIONAL TEACHERS DAY के उपलक्ष में शिक्षकों के लिए ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया| जिसमे मुख्य वक्ता के रूप में डॉ.बी.के. सुनीता बहन (मा. आबू) को निमंत्रण दिया गया तथा राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी (नवसारी सेवाकेंद्र संचालिका) द्वारा सभी शिक्षकों के लिए आशीर्वचन रखे गए|

यह वेबिनर ज़ूम द्वारा तथा यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारित किया गया| जिसमे कार्यक्रम के अंत में सवाल-जवाब के सेशन में कईयों ने सवाल भी पूछे|

डॉ.बी.के. सुनीता बहन (मा. आबू) ने कहा कि – माता पिता बच्चे को जन्म देते है और टीचर उनको सिखाते है कि कैसे उनको स्टैंड होना है, उनका स्टेटस कैसे बने|

* एडिस लेटिन भाषा का शब्द है जिसका अर्थ होता है – बाहर निकलना| इसलिए एजुकेशन देने वाला अर्थात् विद्यार्थियों की छिपी प्रतिभाओं, योग्यताओं, विशेषताओं को बाहर निकलने (जागृत करने) वाला|

* उन्होंने कहा – वर्तमान परिवेश में बच्चों को परा और अपरा दोनों प्रकार की नॉलेज की जरुरत है इसलिए शिक्षक पहले इसका स्वरुप बने| कहा भी जाता है- Knowledge share-Knowledge square अर्थात् यह दायरा बढ़ता जायेगा|

* बच्चों को, फ्यूचर जनरेशन को यह भी सिखाया जाये कि – किसी भी प्रकार की समस्या आये तो वे कैसे उसका सामना करें? इसके लिए स्वयं को राजयोग मैडिटेशन से सशक्त बनाया जाये|

* टीचर प्रतिज्ञा करें अपने से – सिर्फ इम्प्रेस नहीं करें अपने करिश्मा स्टाइल से बल्कि इम्प्रेस और इन्स्पायेर  करें अपने टाचिंग्स के साथ साथ अपने करेक्टर से, अपने प्योर और पॉजिटिव वाइब्रेशन से

* टीचर अपने अंदर के जेनुअन पर्सन को जेनुअन वाइब्रेशन देना है | सिर्फ बहार की पर्सनालिटी नहीं बल्कि आंतरिक पर्सनालिटी को जागृत करें |

* टीचर्स ये ध्यान में रखकर टीच करें कि हमें सिर्फ इनफार्मेशन नही देना है बल्कि ट्रांसफॉर्मेशन करना है| अपने कमजोरियों को ख़त्म करना है, अपनी स्ट्रेंथ को बढ़ाना है| अगर खुद के लिए हमने किया होगा तो हम अपने विद्यार्थियों से भी करवा पाएंगे|

* इसके लिए चेक करें हमारा स्वयं के साथ इनर टॉक कैसा है? अगर नेगेटिव होगा तो हमारे से वह नकारात्मक वाइब्रेशन ही आटोमेटिक फैलेंगे और हमारा सेल्फ-एस्टीम डाउन हो जायेगा| अत: हमारा स्वयं से सकरात्मक इनर टॉक हो ये ध्यान रखना बहुत ही ज्यादा जरुरी है|

टीचर्स बच्चों धैर्यतापुर्वक को सुने, उन्हें समझने की कोशिश करें फिर प्यार से उनकी समस्या का समाधान दे बजाय अधिक अपेक्षा रखे और अपनी बात थोपने के|

टीचर्स स्टूडेंट्स की स्ट्रेंथ का चिंतन करें क्योंकि हमारा ये सकरात्मक चिंतन चमत्कारिक परिणाम दिलाने वाला है| words के energy level से पहले  thoughts  के energy vibration पहुँच जाते हैं| अत: अपने विचार और दृष्टिकोण पॉजिटिव रखें|

उन्होंने कहा कि टीचर्स सकरात्मक के साथ हैप्पी मूड में हमेशा रहे, हैप्पीनेस हमारे अंदर है, जब इस ATTITUDE से आगे बढ़ेंगे तो वही ख़ुशी के वाइब्रेशन REDIATE  होंगे हमारे से|

अंत में बी.के. सुनीता बहन ने सभी को मास मेडिटेशन भी कराया|

इसके बाद  राजयोगिनी बी.के. गीता दीदी ने  सभी को आशीर्वचन के रूप में कहा कि- मूल्यनिष्ठ समाज के निर्माण में शिक्षा और शिक्षक का महत्वपूर्ण स्थान है| मूल्यनिष्ठ शिक्षा समाज को पतन से बचाने वाली है| शिक्षक को गुरु का स्थान दिया गया है, इसलिए माता पिता से भी ज्यादा ऊँचा स्तर शिक्षक आँका गया है|

शिक्षक का न केवल व्यावसायिक दृष्टिकोण बल्कि श्रेष्ठ समाज के लिए कर्णधार बच्चों के अंदर गुण और सुसंस्कारिता का निर्माण करने में भी बहुत बड़ा योगदान है | क्योंकि किताबों में पदाई जाने वाली बातों से ज्यादा पढ़ाने वाले के व्यव्हार का प्रभाव पड़ता है|

भारत अपनी प्राचीन शिक्षा पद्धति के कारण ही विश्व गुरु कहलाया| परन्तु आज पाश्चात्य संस्कृति का प्राचीन संस्कृति पर दुष्प्रभाव आ गया है| इसे हटाने के लिए सबकी नज़र सिर्फ शिक्षक पर ही है|समाज के लिए मूल्य विहीनता एक बहुत बड़ी चुनौती है इस समस्या को दूर करने के लिए नैतिक शिक्षा के द्वारा आदर्श युवाओं का निर्माण कर सकता है | हमारी संस्कृति में “आचार्य देवो भव” कहा गया है| अपने आचरण से जो विद्यार्थियों को श्रेष्टता की और ले जाये वही श्रेष्ट शिक्षक है|

अंत में प्रिंसिपल श्रीमती वैशाली पारेख ने सबका आभार व्यक्त किया|

300 लोगों ने इस ऑनलाइन वेबिनार में लाभ लिया|

Raj Yoga Shivir

संसार का हर मनुष्य सुख–शांति की तलाश में रोज मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरूद्वारे में गुहार लगा रहा है। पूजा, पाठ, आरती, व्रत, उपवास, तीर्थ आदि धक्के खा खाकर इंसान थक गया है लेकिन सुख शांति आज भी कोसों दूर है.. बल्कि दुख, अशांति बढ़ती जा रही है, इसका एकमात्र कारण है देह अभिमान में वृद्धि होना और इन सब समस्याओं का एकमात्र निवारण और सुख, शान्ति का एकमात्र रास्ता स्व आत्मा का ज्ञान और परमात्मा की सही पहचान । इसी सत्य ईश्वरीय ज्ञान से और ईश्वर प्रदत्त राजयोग मेडिटेशन से सच्ची सुख, शान्ति का खजाना सहज ही मिल जाता है और सारा जीवन तनाव मुक्त होकर खुशहाल हो जाता है।”

जिसमें प्रात: 10 से 12 एवं संध्या 5 से8 बजे तक राजयोग मेडिटेशन का नि:शुल्क प्रशिक्षण दिया जायेगा